एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के एक सीनियर अधिकारी ने कहा है कि भारत बंदरगाह बनाने में बहुत अच्छा है। हमारे पास उन बंदरगाहों को बनाने में मदद करने के लिए पैसा है। हम देख रहे हैं कि कैसे वहां जाकर इन अहम देशों में अपने संसाधनों को मिलाकर आगे बढ़ा सकते हैं। इसलिए हम बंदरगाहों पर ध्यान दे रहे हैं। हम समुद्री सुरक्षा और फिर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान दे रहे हैं। हम 6G पर भी गौर कर रहे हैं। स्टैंडर्ड्स की अगली पीढ़ी कैसी होगी और अमेरिका और भारत इसमें कैसे लीडर और पार्टनर बन सकते हैं। असल में यही मुख्य विषय हैं।
समुद्री सुरक्षा पर फोकस
समुद्री सुरक्षा और गवर्नेंस को बेहतर बनाने के लिए मिलकर काम करना भी दोनों देशों के लिए एक मुख्य फोकस होगा। इसमें इस क्षेत्र में गैर-कानूनी मछली पकड़ने, मानव तस्करी और नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार का मुकाबला करना शामिल हो सकता है। स्टेट डिपार्टमेंट के सीनियर अधिकारी ने संकेत दिया कि रिसर्च वेसल (शोध पोत) होने का दावा करने वाले विदेशी जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखना भी फोकस हो सकता है। यह बात इसलिए अहम है क्योंकि हिंद महासागर में चीनी हाइड्रोग्राफिक रिसर्च वेसल्स की गतिविधियों को लेकर भारत की सुरक्षा चिंताएं लंबे समय से रही हैं।IOSV का एक मुख्य मकसद रणनीतिक प्रोजेक्ट्स के मामले में क्षेत्रीय देशों को चीन की सरकारी कंपनियों के मुकाबले आर्थिक विकल्प देना भी होगा। अधिकारी ने इस पर कहा, 'हम विकल्प देना चाहते हैं और हम हमेशा मुकाबला नहीं कर सकते क्योंकि कभी-कभी लागत का हिसाब सही नहीं बैठता। हमारा प्राइवेट सेक्टर वैसी कीमतें नहीं दे सकता जैसी सरकारी कंपनी दे सकती है और इसलिए हम कहते हैं कि अमेरिका और भारत इस पर मिलकर कैसे काम कर सकते हैं।' IOSV के तहत दोनों देशों की ओर से किए जाने वाले काम में क्षेत्रीय सरकारों की क्षमताओं को बेहतर बनाना भी शामिल होगा।
