वे बताते हैं कि इससे न सिर्फ अनुशासन आता है, बल्कि समय के साथ एक बड़ी राशि जमा करने में भी मदद मिलती है। कुछ दशक पहले, इन्वेस्टर्स के पास ज्यादा विकल्प नहीं थे क्योंकि यहां फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर शुरुआती दौर में था। मल्टीनेशनल कंपनियों के आने से इकॉनमी के ग्लोबलाइजेशन के कारण अब आपके पास चुनने के लिए कई तरह के प्रोडक्ट और ऑप्शन हैं। आइए इनके बारे में जानते हैं...
समय के साथ वेल्थ बनाने के ऑप्शन
हमारे सहयोगी ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में कुछ पारंपरिक प्रोडक्ट (निवेश) भी मौजूद हैं, इसलिए विकल्प बहुत सारे हैं। एक्सपर्ट कहते हैं कि किसी को अपनी रिस्क लेने की क्षमता, सुविधा और उम्र के हिसाब से निवेश का ऑप्शन चुनना चाहिए। अगर आप समय के साथ वेल्थ बनाना चाहते हैं, तो यहां कुछ विकल्प दिए गए हैं, जो आपकी मदद कर सकते हैं।रिकरिंग डिपॉजिट: यह लंबे समय से चल रहा है और इसमें बड़ा अंतर ब्याज दरों में गिरावट और कंपनियों की संख्या में कमी का है। 1990 के दशक में कई नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) के लिए रिकरिंग डिपॉजिट कमाई का एक अच्छा जरिया था। अब, NBFC इंडस्ट्री न सिर्फ कंपनियों की संख्या के मामले में छोटी हो गई है, बल्कि उनके द्वारा दी जाने वाली ब्याज दरें भी कम हो गई हैं। इसलिए, अब सिर्फ बैंक ही इसे सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहे हैं, खासकर नेशनलाइज्ड बैंक।
हालांकि, ब्याज दर बहुत आकर्षक नहीं है, लेकिन यह ऑप्शन पैसे जमा करने के लिए एक अच्छा विकल्प है। वहीं, यह ध्यान रखें कि रिकरिंग डिपॉजिट से मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगता है। बैंकों के अलावा, पोस्ट ऑफिस भी निवेश का विकल्प देते हैं जिसमें आठ प्रतिशत का पक्का रिटर्न मिलता है और इसका समय पांच साल होता है।
प्रोविडेंट फंड: अब बात गारंटीड रिटर्न वाले प्रोविडेंट फंड की। हालांकि, इसमें यह जरूरी नहीं है कि निवेशक हर महीने निवेश करे। चूंकि पब्लिक प्रोविडेंट फंड अकाउंट में हर महीने एक बार इन्वेस्ट करने की अनुमति होती है, इसलिए इन्वेस्टर के लिए हर महीने इन्वेस्ट करना एक विकल्प हो सकता है।
प्रोविडेंट फंड: अब बात गारंटीड रिटर्न वाले प्रोविडेंट फंड की। हालांकि, इसमें यह जरूरी नहीं है कि निवेशक हर महीने निवेश करे। चूंकि पब्लिक प्रोविडेंट फंड अकाउंट में हर महीने एक बार इन्वेस्ट करने की अनुमति होती है, इसलिए इन्वेस्टर के लिए हर महीने इन्वेस्ट करना एक विकल्प हो सकता है।
सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान: म्यूचुअल फंड्स में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला विकल्प है। MFs में डायरेक्ट क्रेडिट, ECS और कभी भी बंद करने जैसी कई सुविधाएं मिलने के कारण, SIP लोकप्रिय है। हालांकि, एसआईपी डेट फंड या इक्विटी फंड, दोनों में की जा सकती हैं, लेकिन ये इक्विटी फंड के साथ ही ज्यादा जुड़ी हुई मानी जाती हैं।
निवेशक के नजरिए से इक्विटी फंड में SIP करना ज्यादा फायदेमंद होता है क्योंकि इससे निवेशक बिना किसी निगरानी के स्टॉक मार्केट के जरिए एक बड़ा फंड जमा कर सकता है। बाजार में तेजी से उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता को देखते हुए, जोखिम उठाने की क्षमता वाले निवेशकों के लिए यह सबसे अच्छे विकल्पों में से एक है।
निवेशक के नजरिए से इक्विटी फंड में SIP करना ज्यादा फायदेमंद होता है क्योंकि इससे निवेशक बिना किसी निगरानी के स्टॉक मार्केट के जरिए एक बड़ा फंड जमा कर सकता है। बाजार में तेजी से उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता को देखते हुए, जोखिम उठाने की क्षमता वाले निवेशकों के लिए यह सबसे अच्छे विकल्पों में से एक है।
बीमा प्लान या पेंशन प्लान: जानकार बताते हैं कि आजकल यूनिट-लिंक्ड प्लान काफी चलन में हैं, इसलिए बीमा प्लान या पेंशन प्लान में हर महीने निवेश करना निवेशकों के लिए एक विकल्प हो सकता है। मासिक भुगतान का फायदा यह है कि निवेशक को बाजार के उतार-चढ़ाव का लाभ मिलता है। हालांकि, इसका नुकसान यह है कि बीमा या पेंशन प्लान में मासिक निवेश, सालाना या छमाही भुगतान के तरीकों की तुलना में ज्यादा महंगा पड़ता है।
सोना: निवेश को लेकर सोना यानी कि गोल्ड भी एक अच्छा विकल्प माना जाता है। ज्वैलर्स द्वारा हर महीने सोने में निवेश का विकल्प देने के अलावा, अब ऐसी नई स्कीमें भी उपलब्ध हैं जिनमें हर महीने सोने में निवेश किया जा सकता है। इस स्कीम का एक अतिरिक्त फायदा यह है कि निवेशक को मौजूदा कीमत पर ही सोना मिलता है, लेकिन भुगतान एक निश्चित समय अवधि में किया जा सकता है।
सोना: निवेश को लेकर सोना यानी कि गोल्ड भी एक अच्छा विकल्प माना जाता है। ज्वैलर्स द्वारा हर महीने सोने में निवेश का विकल्प देने के अलावा, अब ऐसी नई स्कीमें भी उपलब्ध हैं जिनमें हर महीने सोने में निवेश किया जा सकता है। इस स्कीम का एक अतिरिक्त फायदा यह है कि निवेशक को मौजूदा कीमत पर ही सोना मिलता है, लेकिन भुगतान एक निश्चित समय अवधि में किया जा सकता है।
- क्या हर महीने पैसे बचाकर कहीं पर निवेश कर सकते हैं?
हां, हर महीने पैसे बचाकर निवेश कर सकते हैं। - पीएफ का पूरा नाम क्या है?
पीएफ का पूरा नाम प्रोविडेंट फंड है। - म्यूचुअल फंड में एसआईपी क्या है?
म्यूचुअल फंड में एसआईपी एक नियमित और तय समय पर एक निर्धारित राशि को जमा करने की प्रक्रिया है। इसका पूरा नाम सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान है। - एसआईपी में कम से कम कितने रुपये से निवेश शुरू कर सकते हैं?
एसआईपी में कम से कम 100 रुपये से निवेश शुरू कर सकते हैं। - क्या सोना में निवेश किया जा सकता है?
हां, सोना में निवेश किया जा सकता है। यह एक निवेश का विकल्प भी है।
