कैसे बदलने वाला है टेस्ट क्रिकेट, पिंक बॉल को लेकर क्या है प्लान, MCC के अधिकारी ने समझाए नए नियम

कैसे बदलने वाला है टेस्ट क्रिकेट, पिंक बॉल को लेकर क्या है प्लान, MCC के अधिकारी ने समझाए नए नियम
नई दिल्ली: क्रिकेट को बदलते समय के अनुसार ज्यादा रोचक बनाने के लिए आईसीसी नियमों में बदलाव करता रहता है। इसी कड़ी में टेस्ट क्रिकेट को लेकर बदलाव किए गए हैं। वहीं, समय बर्बाद करने पर अब सिर्फ बॉलिंग टीम को परेशानी नहीं होगी, बल्कि बैटिंग करने वाली टीम को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। आईसीसी के नए नियम 1 अक्टूबर से लागू हो चुके हैं। टेस्ट क्रिकेट में पिंक बॉल के इस्तेमाल को ज्यादा आसान बनाने की कोशिश की गई है। वहीं, खेल को तेज करने के लिए बल्लेबाजों पर भी जुर्माना लगाने का प्रावधान बनाया गया है।

क्रिकेट के नियम बनाने वाले एमसीसी ने नए नियमों के बारे में विस्तार से बताया है। इसमें साफ किया गया है कि नियमों में बदलाव का उद्देश्य क्या है और इससे खेल कैसे बेहतर होगा। मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के क्रिकेट प्रमुख फ्रेजर स्टीवर्ट ने मीडिया से बातचीत के दौरान नियमों से परे जाकर कई मुद्दों पर बात की।

गेंद और बैट के बीच संतुलन बनाने की कोशिश

फ्रेजर स्टीवर्ट से पूछा गया कि मौजूदा समय में क्रिकेट का खेल बल्लेबाजों के अनुकूल है। ऐसे में समय बर्बाद करने पर 5 रन की पेनल्टी लगाने का नियम क्या गेंद और बल्ले के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। इस पर उन्होंने कहा, 'यह नियम हमेशा से मौजूद रहा है। बस इसे लागू करने का काम बहुत कम हुआ है और मुझे लगता है कि अब आईसीसी ने तय किया है कि हम इस मामले में थोड़ी सख्ती बरतेंगे। मुझे लगता है कि खेल को जितना तेज किया जा सके, उतना ही बेहतर है। वरना क्रिकेट देखने के लिए भारी भरकम रकम खर्च करने वाले दर्शकों को निराशा होगी। मुझे लगता है कि अंपायर खिलाड़ियों को यह समझाने की कोशिश करते हैं कि इस संबंध में नियम हैं और यदि आप समय बर्बाद करते हैं, तो इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा और बाद में जुर्माने के बजाय खेल के दौरान रनों की पेनल्टी लगाई जाएगी।'

पिंक बॉल को लेकर क्या बोले?

डे-नाइट टेस्ट में पहले से ही पिंक बॉल का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन अब सिर्फ दिन में खेले जाने वाले टेस्ट मैच में भी पिंक बॉल के उपयोग की अनुमति दे दी गई है। इस पर उन्होंने कहा कि यह आईसीसी की प्लेइंग कंडीशन का हिस्सा है, क्रिकेट का नियम नहीं है। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना ​​है कि 2 देशों के बीच सीरीज में, जैसे कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच, यह दोनों देशों को आपस में तय करना चाहिए कि क्या वे गुलाबी गेंद का इस्तेमाल करेंगे। कुछ लोगों का मानना ​​है कि आप लाल गेंद से शुरुआत कर सकते हैं और फिर जब थोड़ा अंधेरा हो जाए, तो आप गुलाबी गेंद का इस्तेमाल कर सकते हैं। मेरी समझ से ऐसा नहीं हो रहा है। दोनों पक्षों की सहमति जरूरी है और अगर वे गुलाबी गेंद से खेलने के लिए तैयार हैं, तो शायद इसलिए क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे खराब मौसम के बाद भी खेल जारी रह सकेगा।'

धीमी ओवर रेट पर भी चर्चा

धीमे ओवर रेट के सवाल पर उन्होंने कहा कि नियमों में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों टीमों के लिए उपाय हैं। इन नियमों को लागू करना अंपायरों का काम है और अगर उन्हें लगता है कि खेल की गति धीमी है, चाहे वह फील्डिंग कप्तान हो या बल्लेबाजी करने वाली टीम, तो उन्हें चेतावनी दी जाती है। इसके बाद पेनल्टी रन लगाए जाएंगे। लेकिन अंपायरों को इसे लागू करने की आवश्यकता है, और उन्हें मैच रेफरी का समर्थन होना चाहिए।
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