दोस्त का इंटरव्यू दिलाने गए थे, नौकरी खुद को मिल गई, फिर शुरू किया ऐसा बिजनेस जो 19000 करोड़ रुपये का हो गया

दोस्त का इंटरव्यू दिलाने गए थे, नौकरी खुद को मिल गई, फिर शुरू किया ऐसा बिजनेस जो 19000 करोड़ रुपये का हो गया
नई दिल्ली: 3000 रुपये की नौकरी, किंडरगार्टन का छोटा कमरा और फिर हजारों करोड़ की कंपनी... यह कहानी है पीयूष सोमानी की, जिन्होंने बेहद साधारण शुरुआत के बावजूद टेक्नोलॉजी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। एक समय पीयूष अपने दोस्त को जॉब का इंटरव्यू दिलाने गए थे, लेकिन खुद को नौकरी मिल गई। बाद में उन्होंने बिजनेस की दुनिया में कदम रखा। उनकी कंपनी ESDS Software Solution हाल ही में शेयर मार्केट में लिस्ट हुई है। इस समय कंपनी का मार्केट कैप 19000 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो गया है।

कभी नासिक के एक किंडरगार्टन के छोटे से कमरे में सात दोस्तों के साथ काम शुरू करने वाली ESDS सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन आज क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर के कारोबार में पहुंच चुकी है। वह इस कंपनी के एमडी और चेयरमैन हैं। शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद कंपनी की वैल्यूएशन में भी बड़ा उछाल देखने को मिला है।

किंडरगार्टन में बना पहला ऑफिस

साल 2004 में जब पीयूष सोमानी ने अपना कारोबार शुरू किया, तब उनके पास न बड़ा ऑफिस था और न ही कोई बड़ा निवेशक। शुरुआत एक कंप्यूटर, बेसिक इंटरनेट कनेक्शन और टेक्नोलॉजी बिजनेस बनाने के भरोसे से हुई।

नासिक के कॉलेज रोड स्थित एक किंडरगार्टन के छोटे से कमरे को शुरुआती ऑफिस बनाया गया। दिन में जहां बच्चों की क्लास चलती थी, वहीं बाकी समय उसी कमरे में सोमानी और उनके सात दोस्तों की टीम वेब-होस्टिंग और सपोर्ट का काम करती थी।

दोस्त की जगह खुद को मिल गई नौकरी

पीयूष सोमानी की राह शुरुआत से आसान नहीं थी। साल 1997 में उन्होंने पुणे यूनिवर्सिटी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लेने की कोशिश की, लेकिन सीटों की कमी के कारण उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में जाना पड़ा। उन्हें यह बदलाव पसंद नहीं आया और वह पहले साल में फेल भी हो गए।

बाद में पिता की सलाह पर उन्होंने कंप्यूटर से जुड़ा 15 दिन का कोर्स किया। इस छोटे से कोर्स ने टेक्नोलॉजी के प्रति उनकी सोच बदल दी। इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने मुंबई में नौकरी की, जहां उनकी शुरुआती सैलरी सिर्फ 3,000 रुपये महीना थी।
लेकिन नौकरी उन्हें ज्यादा समय तक रोक नहीं पाई। वह नासिक लौट आए। इसी दौरान एक दोस्त के साथ IT नौकरी के इंटरव्यू में पहुंचे। इंटरव्यू उनके दोस्त का था, लेकिन कंपनी के मालिक को सोमानी की बातचीत पसंद आ गई और नौकरी उन्हें मिल गई।

2004 में शुरू हुआ ESDS का सफर

नौकरी के अनुभव के बाद सोमानी ने अपना कारोबार शुरू करने का फैसला किया। साल 2004 में सात दोस्तों के साथ वेब-होस्टिंग और सपोर्ट बिजनेस शुरू किया गया। जनवरी 2005 में कंपनी को आधिकारिक तौर पर ESDS यानी Exuberant Support and Data Center Services के नाम से रजिस्टर किया गया।
कारोबार बढ़ने के साथ कंपनी ने ब्रिटेन और अमेरिका में अधिग्रहण के जरिए भी विस्तार किया। हालांकि, शुरुआती सात साझेदारों के बीच समय के साथ मतभेद हुए और बाकी पार्टनर कंपनी से अलग हो गए। इसके बाद कारोबार की जिम्मेदारी मुख्य रूप से सोमानी के कंधों पर आ गई।

डेटा सेंटर में बड़ा दांव

साल 2008 में सोमानी ने नासिक के सतपुर इंडस्ट्रियल एरिया में करीब एक एकड़ जमीन खरीदी और अपना डेटा सेंटर बनाने का फैसला किया। उस समय यह फैसला काफी बड़ा दांव था। लेकिन 2010 में डेटा सेंटर शुरू हो गया।
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