क्यों बढ़ी कीमत?
उन्होंने कहा कि कीमतों में यह उछाल बुनियादी कारणों से नहीं था, क्योंकि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक है। हालांकि 2025-26 मार्केटिंग वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) के लिए उत्पादन 343 लाख टन के शुरुआती अनुमान से घटकर 306 लाख टन रह गया है। सालाना घरेलू मांग लगभग 280-285 लाख टन है। पिछले हफ्ते, सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी। इसके अलावा थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक सीमाएं लगाईं गई हैं और राज्यों को जमाखोरी और सट्टेबाजी की जांच के लिए निरीक्षण तेज करने का निर्देश दिया गया है।नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) के एमडी प्रकाश नाइकनवारे ने कहा कि देश के किसी भी राज्य में चीनी की एक्स-मिल कीमत अभी 55 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि जमाखोरी की जांच के लिए देश भर में फ्लाइंग स्क्वाड तैनात किए गए हैं और केंद्र के हस्तक्षेप से कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि एक्स-मिल कीमतों में और गिरावट की उम्मीद है।
एक्स-मिल वर्सेज खुदरा कीमत
नाइकनवारे ने बताया कि आमतौर पर एक्स-मिल और थोक कीमतों के बीच 2-3 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर होता है और एक्स-मिल तथा खुदरा कीमतों के बीच 7-8 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर होता है। हालांकि, एक्स-मिल कीमतों में गिरावट का असर अभी थोक और खुदरा बाजारों में नहीं दिखा है।उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चीनी की औसत अखिल भारतीय थोक कीमत 58.29 रुपये प्रति किलोग्राम पर ऊंची बनी हुई है, जबकि 24 अगस्त को औसत खुदरा कीमत 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम थी।
