नई दिल्ली: एफसीआरए यानी 'फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल' में संपत्ति सौंपने का प्रावधान सबसे ज्यादा विवादित है। हालांकि, कानून मंत्रालय का कहना है कि यह प्रस्ताव असल में मौजूदा कानून में एक सुधार है। सरकार का कहना है कि FCRA का व्यवस्थित ढांचा विदेशी फंड से बनी संपत्तियों के प्रबंधन में कानूनी निश्चितता, प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही को बढ़ाता है।मुश्किलों का करना पड़ा सामना
मंत्रालय ने विधेयक की जांच कर रही संसद की एक संयुक्त समिति को बताया कि मौजूदा कानून संपत्ति के स्वामित्व का प्रावधान करता है। लेकिन इस तरह के अधिकार की प्रकृति, अवधि और अंतिमता के बारे में नहीं बताता है। सूत्रों के मुताबिक इससे संपत्ति के प्रबंधन में खुली हिरासत व्यवस्था और प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।SBI ही है एकमात्र अधिकृत बैंक
मीटिंग में मिनिस्ट्री का प्रतिनिधित्व लेजिस्लेटिव सेक्रेटरी राजीव मणि ने किया। मीटिंग में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने बिल के उद्देश्यों का समर्थन तो किया लेकिन कई सुझाव दिए, चिंताएं जताईं और और स्पष्टता की मांग की। इनमें यह बात भी शामिल थी कि जब किसी संगठन की विदेशी चंदा लेने की अनुमति खत्म हो जाए, तो उसके अकाउंट्स और जमा राशि को कैसे संभाला जाए। बता दें कि एसबीआई अपनी नई दिल्ली की मुख्य ब्रांच में विदेशी योगदान लेने के लिए अधिकृत एकमात्र बैंक है
आपस में क्यों भिड़ गए सांसद
विपक्षी दलों और भाजपा के सांसद विधेयक के प्रावधानों को लेकर आपस में भिड़ गए और दो द्रमुक सांसदों, ए राजा और पी विल्सन ने विधेयक को अनुच्छेद 300 (ए) का उल्लंघन करार दिया, जिसमें कहा गया है कि कानून के अधिकार के अलावा किसी को भी उनकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा। उन्होंने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसलों में बताया है कि सरकार किस आधार पर संपत्तियों को जब्त कर सकती है और एफसीआरए बिल इसका उल्लंघन है।दोहरे कोटे का फायदा संभव
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि ट्रस्टों और सोसायटियों की निगरानी करने वाले कानूनों में संपत्ति जब्त करने के समान प्रावधान हैं। धर्म-परिवर्तन के लिए विदेशी पैसे के कथित गलत इस्तेमाल के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इससे अल्पसंख्यक धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को कुछ मामलों में दोहरे कोटे का फायदा मिल सकता है, जो समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
संभावित अंतर की ओर इशारा
सूत्रों के मुताबिक SBI के चेयरमैन सी.एस. सेट्टी की अगुवाई में बैंक के सीनियर अधिकारियों की एक टीम ने कहा कि हालांकि बिल में ऐसे मामलों में विदेशी योगदान और संपत्ति पर सरकार के कंट्रोल का प्रावधान है, लेकिन बैंकिंग से जुड़ी विस्तृत प्रक्रिया को नियमों के तहत तय करने के लिए छोड़ दिया गया है। SBI अधिकारियों ने रजिस्ट्रेशन खत्म होने की तारीख और बैंक को इसकी जानकारी मिलने की तारीख के बीच संभावित अंतर की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि अधिकृत अथॉरिटी या गृह मंत्रालय के निर्देशों पर ईमानदारी से काम करने वाले बैंकों के लिए कोई स्पष्ट सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। बैंक ने कहा कि जब किसी संगठन का रजिस्ट्रेशन खत्म हो जाता है, तो विदेशी योगदान को मैनेज करने के लिए एक स्पष्ट कानूनी ढांचा होना चाहिए। बैंक ने मांग की कि नए नियम लागू होने से पहले विस्तृत नियम, बैंकों के लिए एक जैसी प्रक्रियाएं और रजिस्ट्रेशन की स्थिति के बारे में तुरंत अपडेट दिए जाएं।