RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत में भी बांग्लादेश और फ्रांस जैसे हालात बनाने की कोशिश हो रही है। दुनिया में ऐसी शक्तियां हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं। उनका मकसद सत्ता परिवर्तन कर हालात सुधारना नहीं, बल्कि अपने पिट्ठू बैठाना है।
भागवत मंगलवार को नागपुर संघ मुख्यालय में आयोजित विजयादशमी उत्सव में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि कुछ लोग भारत और हिंदू समाज को तोड़ना चाहते हैं और उन्हें ऐसे नेताओं का भी समर्थन मिलता है।
RSS हर साल विजयादशमी पर अपना स्थापना दिवस मनाता है। 1925 में इसी दिन संघ की स्थापना हुई थी। भागवत ने कार्यक्रम में शस्त्र पूजन किया।
भागवत के भाषण की 5 बड़ी बातें
1. आंदोलन का उद्देश्य समाधान हो, समाज में विभाजन नहीं
समस्याओं के कारण आंदोलन होते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य समाधान होना चाहिए, न कि समाज में द्वेष और विभाजन पैदा करना। कई बार आंदोलनों को दूसरे उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है और वे राजनीति का साधन बन जाते हैं। समाज और देश को सिर्फ नेता नहीं चलाते, बल्कि समाज की सक्रियता से भी समस्याओं का समाधान होता है।
2. एकता के सूत्र में बंधे रहेंगे तो कोई हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता
दुनिया में ऐसी शक्तियां हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं। उनके प्रभाव में आकर हमें उत्तेजित नहीं होना चाहिए। लॉर्ड कर्जन ने हिंदू-मुस्लिम आधार पर बंगाल का विभाजन किया था, जिसे चार साल बाद वापस लेना पड़ा। लेकिन 1947 में देश का विभाजन नहीं रुक सका, क्योंकि लोगों के मन में आ गया था कि जो अलग दिखते हैं, वे अलग ही हैं।
3. हमारे पूर्वज एक, सबको साथ लेकर चलना जरूरी
हम सभी के पूर्वज एक हैं और हमारी संस्कृति का मूल भी एक है। किसी की अलग पहचान मिटाए बिना सभी को साथ लेकर चलना चाहिए। भारत की परंपरा और विचारों में दुनिया की समस्याओं का समाधान देने की क्षमता है।
4. विकास हो, लेकिन प्रकृति का नुकसान न हो
भागवत ने नेपाल बाढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि विकास के लिए तकनीक को बढ़ावा देना जरूरी है, लेकिन इससे प्रकृति को नुकसान नहीं होना चाहिए। विकास ऐसा हो, जिसमें इकोनॉमी के साथ इकोलॉजी और एथिक्स का भी ध्यान रखा जाए।
5. OTT के नियम तय हों, AI का सही इस्तेमाल हो
आज लोगों को हर तरह की जानकारी मिल रही है, लेकिन सही-गलत समझे बिना उसका इस्तेमाल करने से नुकसान हो सकता है। OTT प्लेटफॉर्म पर नियम होने चाहिए और सरकार-प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा AI का सही इस्तेमाल करना जरूरी है।
कार्यक्रम में इजराइल के काउंसल जनरल भी पहुंचे
कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़, इजराइल के काउंसल जनरल यानिव रेवाच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद रहे।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि एकता के सूत्र में रहेंगे, उनका कोई कुछ नहीं कर सकता। लॉर्ड कर्जन ने हिंदू-मुस्लिम के आधार पर बंगाल का विभाजन किया, लेकिन 4 साल बाद विभाजन वापस लेना पड़ा।
लेकिन 1947 में ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि मन में विचार आ गया था कि हम दिखते अलग हैं, इसलिए सब अलग है। तुष्टिकरण के कारण हमे तोड़ने वाली मानसिकता का बढ़ावा मिला।
जिस सुख और शांति की सोच के साथ विभाजन किया गया था, वो तो हुआ नहीं, लेकिन सीमा पर आज भी अशांति है। अपने छोटे-छोटे अहंकार भूल जाइए। देश के लिए जीना हमारा कर्तव्य है।
सबको जोड़ने वाला, एकसाथ ऊपर उठाने वाला जो तत्व है, उसी को धर्म कहते हैं। हमें धर्म तत्व से विकास करने वाला भारत बनाना है। हमें दुनिया के सामने उदाहरण पेश करना होगा।
मोहन भागवत ने कहा कि समस्या के कारण आंदोलन होते हैं, लेकिन आंदोलन समाधान के लिए होने चाहिए। आंदोलन करने वाला कोई समूह हो, अखंड समाज में किसी प्रकार का विभाजन, द्वेष नहीं होना चाहिए। आंदोलन से समस्या का समाधान होगा, इसके उदाहरण बहुत कम हैं।
समाज की सक्रियता से समाधान के कई उदाहरण है। समाज और देश को केवल नेता नहीं चला रहा, समाज देश को चलाता है। आंदोलन किसी दूसरे लक्ष्य से चले तो राजनीति का साधन बन जाता है, विरोध भड़काने का काम करता है।
समाज से काटकर एक अलग वर्ग बनाना और व्यवस्था के बारे में विरोध बनाना, कलह करना, पहले भी करते आए हैं और आज भी कर रहे हैं। विश्व में भारत को दबाने वाली शक्तियां मौजूद हैं। किसी तरह से उत्तेजित नहीं होना है। हमको सतत प्रयास करने पड़ेंगे।
मोहन भागवत ने कहा कि पश्चिम से आंधी चली है, जो हर तरह के संस्कृति से विरोध रखती है, उसे नष्ट करना चाहती है। फ्रांस में क्या हो रहा है, नेपाल में बांग्लादेश में क्या हुआ। वो कहते हैं कि रिजीम चेंज (सरकार बदलने) करने से हालात बदलेंगे, लेकिन न ऐसा पहले हुआ है, न आगे होगा।
भारत में भी ऐसे प्रयास चल रहे हैं, लेकिन पिछले सालों से जिस नीति से भारत चला, उसने पक्के नेतृत्व ने इसे चलाया। नई पीढ़ी के कारण भारत का जो पुरुषार्थ बना, आसुरी ताकत का खेल बंद हो गया, इसलिए भारत इनका लक्ष्य है।
संघ प्रमुख ने कहा कि संघर्ष के कारण मन में घाव पड़े हैं। गांठें भी पड़े हैं। ये गांठें सुलझ जाए, नई गांठें न पड़े, ऐसा हमारा व्यवहार होना चाहिए। छोटी छोटी बातों पर उकसाने वाले ताक लगाकर बैठे हैं।
कई लोग झगड़ा लगाना चाहते हैं। संघ पर भी उछालते हैं। जिनका संघ से कोई लेना देना है, फिर भी संघ पर सवाल उठाते हैं। संघ सबसे प्रति प्रेम रखता है। संघ स्वयं के लिए कुछ नहीं चाहता, न लोकप्रियता, न प्रतिष्ठा। समाज का जिससे भला हो, हम वो करते हैं।
संघ प्रमुख ने कहा कि हमारा जीवन भारत के लिए कुर्बान हो गया तो ये सौभाग्य की बात है। यही भाव लेकर स्वतंत्रता सेनानियों ने ब्रिटिशों को भारते से जाने के लिए मजबूर किया। कैप्टन स्मित मच्छर ने जो किया है, वह इसी भाव के कारण था।
दिखने में हमारा समाज अलग-अलग दिखता है, लेकिन अंदर से एक है। किसी भाषा में, किसी पंथ, रीति-रिवाजों में रहना पड़ता है, लेकिन अंदर की एकता का ध्यान रखना चाहिए। अपनापन होना चाहिए और दिखना चाहिए।
भागवत ने कहा कि किसी की छोटी-सी पहचान को नष्ट किए बिना सबको एक साथ लेकर चलने की क्षमता होनी चाहिए। हमारे सबके पूर्वज एक हैं। हम सबका मूल एक हैं। तब से आज तक इस संस्कृति के लिए खून पसीना बहाया है
हमारा स्वभाव परंपरा से आया है। उसके मूल बोध के अनुसार, आज के समय के अनुसार, जीवन को गढ़ते जाना जरूरी है। हमारे पूर्वज आज तक सभी परिस्थितियों में जीते आए हैं। यही आदर्श हमें दुनिया के सामने रखना है।
भारत की प्रगति हो रही है, लेकिन दुनिया को एक नई रास्ता देने की जरूरत भी है। हिंदू दृष्टि में किसी अमुख पूजा का अनिवार्यता नहीं है। पूजा कौन सी है, पूजा करते हैं कि नहीं करते , हिंदू दृष्टि यह नहीं पूछती। ये सबके लिए है। यह मानवीय धर्म है।
भागवत ने कहा कि नेपाल में जो हुआ, वह क्यों हुआ। हिमालय जहां से गुजरता है वहां विकास के प्रयास के कारण प्रकृति की अस्थिरता उत्पन्न हुई, तकनीक को बढ़ावा दिया गया लेकिन इतनी बड़ी संख्या में जनहानि हुई। जो विकास सबको साथ लेकर चले, ऐसा विकास चाहिए।
ऐसा विकास नहीं चाहिए कि विकास करने वाला ही न बचे। ये सब सीखते हुए, ज्ञान और तकनीकी का विकास बढ़ना चाहिए, लेकिन इकॉनोमी के साथ इकोलॉजी और एथिक्स के साथ बढ़ना होगा। AI जैसी और भी टेक्नोलॉजी आएंगी, लेकिन उसका इस्तेमाल करना आना चाहिए।
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत के विश्वगुरु बनने की बात करते हैं, लेकिन इसका भार नई पीढ़ी के कंधों पर आने वाला है। नई पीढ़ी को इस दायित्व के लिए तैयार होना पढ़ेगा। हमें उन्हें तैयार करना पड़ेगा। तकनीक के लाभ हैं, उसे रोका नहीं जा सकता। लेकिन ज्ञान और तकनीक सिर्फ साधन है। मायने यह रखता है कि इनका उपयोग कैसे कर रहे हैं।
RSS प्रमुख ने बताया कि पहले आचरण पड़ोसियों, किताबों से, समाज से मिलता था, लेकिन धीरे-धीरे यह खत्म हो रहा है। यह बिना विवेक के कैसे होगा।
शराबबंदी के प्रचार के लिए अफसर गांव गए, एक ग्लास शराब में कीड़े डाल दिए और पूछा कि इससे क्या समझ रहे हैं। एक शराबी ने कहा कि पेट के कीड़े भी ऐसे ही मर जाएंगे।
क्या सिखाने गए थे, लोग क्या सीख गए। लोगों को पता है कि नशीली दवाओं के दुष्परिणाम हैं, फिर भी लोग इसका सेवन कर रहे हैं। बिना सही, गलत समझे आचरण करने से गलत परिणाम हो सकता है।
मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया को नहीं पता कि विकास और पर्यावरण को एकसाथ कैसे चलाएं। जो अपने जैसे नहीं है, उनसे सामंजस्य कैसे बनाएं। उनके जवाब विश्व के पास नहीं है। नए पीढ़ी के संस्कार खत्म हो रहे हैं। प्राकृतिक तनाव के साथ भू-राजनीतिक तनाव भी बढ़ रहा है। विश्व को पता है कि भारत के पास इनके जवाब है।
मोहन भागवत ने कहा कि सभी विविधताओं का सम्मान करें। विविधता परिवर्तनशील है, इसलिए बदलते वक्त के साथ बदलना चाहिए। लचीलापन इसी सनातन दृष्टि का परिणाम है। जब हम भावनात्मक दृष्टि से एक थे, दो दुनिया में श्रेष्ठ थे। इसे भूल गए तो विभाजित हो गए। विविधता परिवर्तनशील है, इसलिए बदलते वक्त के साथ बदलना चाहिए। लचीलापन इसी सनातन दृष्टि का परिणाम है।
संघ प्रमुख ने कहा कि आधारभूत तत्व ऐसा चाहिए तो सबको सम्मान देगा। सबकी प्रतिष्ठा की चिंता करेगा। ऐसा विचार परंपरा में हमारे पास है। ये परंपरा के नाते नहीं चल रही है। सृष्टि में विविधता है, लेकिन परिवर्तनशील भी है। सुख को प्राप्त करना जीवन का मकसद है। उसके लिए संयमपूर्ण, त्यागपूर्ण जीवन चाहिए।
भागवत ने कहा कि हम विभाजित होकर दुर्बल हो गए। इसके बाद सैकड़ों साल की गुलामी झेलनी पड़ी। महापुरुषों के बलिदानों के बाद हमें आजादी मिली। देश की स्वाधीनता के समय जो वातावरण था, उसमें हमें स्वतंत्र करने वाले जिन्होंने तपस्या की, आज इससे ज्यादा तप करने की जरूरत है।



