भारत से दूरी बना रहे तारिक रहमान
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद शुरुआती दौर में भारत की यात्रा को प्राथमिकता देते रहे हैं, लेकिन इसी साल फरवरी में हुए चुनाव के बाद आई तारिक रहमान ने ऐसी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। इसके बजाय तारिक रहमान ने पहली विदेश यात्रा के लिए मलेशिया को चुना और उसके बाद वह चीन के दौरे पर भी गए।बांग्लादेश में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP सरकार के आने के बाद दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन ढाका ने अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। हालांकि, तारिक रहमान के आने के बाद पूर्ववर्ती अंतरिम सरकार के दौर में जमी बर्फ जरूरी पिघली है और संबंध स्थिर हुए हैं।
कट्टरपंथियों के दबाव में तारिक रहमान सरकार
बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार देश के अंदर इस्लामिक कट्टरपंथी ताकतों के दबाव का सामना कर रही है। ठीक उसी समय नई दिल्ली और ढाका के बीच कुछ अनसुलझे मुद्दों को लेकर तनाव है। इसमें सीमा-पार नदी जल बंटवारा और भारत से अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की वापसी जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।
कट्टरपंथियों के दबाव में तारिक रहमान सरकार
बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार देश के अंदर इस्लामिक कट्टरपंथी ताकतों के दबाव का सामना कर रही है। ठीक उसी समय नई दिल्ली और ढाका के बीच कुछ अनसुलझे मुद्दों को लेकर तनाव है। इसमें सीमा-पार नदी जल बंटवारा और भारत से अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की वापसी जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।भारत-बांग्लादेश के बीच अनसुलझे मुद्दे
भारत और बांग्लादेश के बीच बहुचर्चित जल-बंटवारा संधि इसी साल दिसम्बर में खत्म हो रही है। अभी तक इस संधि को बढ़ाने पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। हालांकि, बांग्लादेश ने उम्मीद जताई है कि पानी को लेकर भारत उचित फैसला करेगा।इसके साथ ही ढाका ने भारत से बांग्लादेशी घुसपैठियों की वापसी पर आपत्ति जताई है। ढाका ने भारत पर जबरन लोगों को सीमा पार भेजने का आरोप लगाया है, जबकि नई दिल्ली का कहना है कि वह अवैध लोगों को देश में स्वीकार नहीं करेगा। इस मुद्दे को लेकर सीमा पर दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच कई बार तनाव की स्थिति बन चुकी है।











