2800 करोड़ रुपये से बनेंगे पांच सोलर पार्क
उद्योग विभाग के अनुसार बांदा जिले में पांच बड़े सोलर एनर्जी पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के लिए 57 निवेशकों ने रुचि दिखाई थी, जिनमें से पांच प्रमुख उद्यमियों ने सौर ऊर्जा क्षेत्र में अपने प्रोजेक्ट शुरू किए हैं।इन सभी परियोजनाओं के लिए भूमि क्रय की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि वन विभाग, राजस्व विभाग और अन्य संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेने की प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही सभी अनुमतियां मिल जाएंगी, निर्माण कार्य तेजी से शुरू कर दिया जाएगा।
नई परियोजनाओं के जुड़ने से लगभग 240 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन होने की उम्मीद है। इससे न केवल स्थानीय बिजली आपूर्ति मजबूत होगी, बल्कि बांदा की पहचान एक ऊर्जा उत्पादक जिले के रूप में भी स्थापित होगी।
240 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की क्षमता
इन पांच सोलर पार्कों के शुरू होने के बाद बांदा जिले की बिजली उत्पादन क्षमता में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। वर्तमान में जिले में दो सोलर पार्क संचालित हैं, जिनसे लगभग 75 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।नई परियोजनाओं के जुड़ने से लगभग 240 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन होने की उम्मीद है। इससे न केवल स्थानीय बिजली आपूर्ति मजबूत होगी, बल्कि बांदा की पहचान एक ऊर्जा उत्पादक जिले के रूप में भी स्थापित होगी।
कुछ परियोजनाओं पर काम शुरू
नरैनी तहसील के गुढ़ा क्षेत्र में रिमझिम इस्पात प्लांट द्वारा 45 मेगावाट क्षमता का सोलर पार्क स्थापित किया जा रहा है। वहीं आलोना क्षेत्र में अबाडा परियोजना के तहत भी सोलर प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है।परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार जैसे ही सभी आवश्यक एनओसी प्राप्त हो जाएंगे, इन इकाइयों से बिजली उत्पादन भी शुरू कर दिया जाएगा।
गैस आधारित ऊर्जा परियोजना की भी तैयारी
सिर्फ सोलर एनर्जी ही नहीं, बल्कि बांदा में अब गैस आधारित ऊर्जा उत्पादन की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) बांदा और चित्रकूट में गैस प्लांट लगाने की योजना पर काम कर रही है।बांदा बनेगा ऊर्जा आत्मनिर्भरता का केंद्र
उपायुक्त उद्योग गुरुदेव के अनुसार जिले में पांच ग्रीन एनर्जी पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें से कुछ परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है, जबकि शेष जल्द ही शुरू की जाएंगी।उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से न केवल बिजली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही बांदा की पहचान अब एक पिछड़े ऊर्जा क्षेत्र से बदलकर ग्रीन एनर्जी हब के रूप में उभरने लगेगी।











