89 लाख करोड़ का मार्केट चुपचाप होने लगा है तैयार, पुराने सोलर पैनल में छुपा बड़ा बिजनेस

89 लाख करोड़ का मार्केट चुपचाप होने लगा है तैयार, पुराने सोलर पैनल में छुपा बड़ा बिजनेस
नई दिल्‍ली: दुनियाभर में सोलर पावर का इस्‍तेमाल तेजी से बढ़ा है। इसके चलते पर्यावरण के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। यह है करोड़ों फोटोवोल्टिक (PV) पैनलों का निपटान। ऐसा तब होगा जब वे अपने काम करने की अवधि पूरी कर लेंगे। 'नेचर' में छपी एक स्टडी में इस बारे में एक अनुमान जाहिर हुआ है। इसके मुताबिक, 2060 तक दुनियाभर में PV कचरा 29.7 करोड़ से 40.2 करोड़ टन तक पहुंच सकता है। हालांकि, इसका एक बड़ा आर्थिक पहलू भी है।

रिसर्चर्स ने पाया कि इन बेकार हो चुके सिस्टम को रीसायकल करने से कुल मिलाकर 529.1 अरब डॉलर से 935.5 अरब डॉलर (लगभग 89 लाख करोड़ रुपये) का आर्थिक फायदा हो सकता है। साथ ही 3.32 अरब टन तक कार्बन डाईऑक्‍साइड के बराबर उत्सर्जन को कम किया जा सकता है।
आम तौर पर स्टैंडर्ड सोलर पैनल 25 से 30 साल तक काम करते हैं। दुनियाभर में तेजी से इनके इस्तेमाल के बाद 2030 और 2060 के बीच पैनलों के बेकार होने की रफ्तर बहुत बढ़ जाएगी।

उम्मीद है कि हर साल बेकार होने वाले PV पैनलों की मात्रा 2020 में सिर्फ 0.2 लाख टन से बढ़कर 2060 तक 1.9 करोड़ टन से ज्‍यादा हो जाएगी। चीन में सबसे ज्‍यादा बेकार हार्डवेयर पैदा होने की उम्मीद है। यह 11.28 करोड़ से 16.05 करोड़ टन के बीच होगा। वहीं, भारत में 2.68 करोड़ से 3.52 करोड़ टन कचरा पैदा होने का अनुमान है। यह दुनियाभर के कुल कचरे का लगभग 8.6% से 9.2% होगा।

कीमती कच्चे माल को हासिल करना

बेकार हो चुके सोलर पैनलों में सिलिकॉन, सिल्वर, कॉपर और टेल्यूरियम जैसे जरूरी मटीरियल होते हैं। हालांकि, कुछ मॉड्यूल में लेड और कैडमियम जैसे जहरीले पदार्थ भी होते हैं। इसलिए इनका सुरक्षित निपटान और प्रोसेसिंग बहुत जरूरी है।

इन तत्वों को निकालकर बेकार हो चुके पैनलों को क्लीन-टेक मैन्युफैक्चरिंग के लिए कच्चे माल के एक अहम दूसरे स्रोत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। फिर भी मौजूदा रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी की लागत, क्षमता और पर्यावरण पर असर में बहुत अंतर है।

आर्थिक रूप से फायदेमंद बनाने का रास्ता

रिसर्चर्स का अनुमान है कि PV रीसाइक्लिंग 2035 और 2040 के बीच आर्थिक रूप से फायदेमंद हो जाएगी। जैसे-जैसे क्षमताएं बेहतर होंगी, प्रोसेसिंग की लागत 2020 में 342-2,550 डॉलर प्रति टन से घटकर 2040 तक 55.9-402.7 डॉलर प्रति टन हो जाने का अनुमान है।
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