नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का नया अध्याय : मुख्यमंत्री श्री साय

नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का नया अध्याय : मुख्यमंत्री श्री साय
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए सबसे बड़े गर्व और संतोष का विषय यह है कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों तथा सुरक्षाबलों के अदम्य साहस से 31 मार्च 2026 को प्रदेश को दशकों पुरानी नक्सल समस्या से निर्णायक मुक्ति मिली।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के विजन ‘कंधे पर गन नहीं, कंधे पर हल ही सभी समस्याओं का हल है’ ने बस्तर में स्थायी शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त किया है। नक्सल उन्मूलन के लिए केंद्र सरकार से 2,080 करोड़ रुपये की विशेष सहायता मिली। आत्मसमर्पित कैडरों और नक्सल पीड़ित परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना में 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 5,671 आवासों का निर्माण जारी है।

आरसीपीएलडब्ल्यूई के अंतर्गत 267 सड़कें और आठ पुल पूर्ण हो चुके हैं। पीएमजीएसवाई-4 के अंतर्गत 699 करोड़ रुपये से 228 सड़कों का निर्माण हो रहा है। नक्सल हिंसा के कारण वर्षों से बंद 421 स्कूलों को पुनः प्रारंभ किया गया है। ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के माध्यम से दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य, शिक्षा, राशन सहित शासन की विभिन्न सुविधाएं पहुंच रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना के साथ अब शिक्षा, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी, पर्यटन, निवेश और आजीविका के नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं।

राष्ट्रहित में बड़े और साहसिक निर्णयों का दौर

मुख्यमंत्री ने कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने भारत के दृढ़ राष्ट्रीय संकल्प को दुनिया के सामने रखा है। वन रैंक वन पेंशन और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद का सृजन राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण निर्णय रहे हैं।

अनुच्छेद 370 की समाप्ति से जम्मू-कश्मीर का भारत में पूर्ण संवैधानिक एकीकरण हुआ। औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देकर सामाजिक न्याय को भी मजबूती प्रदान की गई।

‘विकास भी, विरासत भी’ की भावना हुई साकार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम और 500 वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या में श्रीरामलला के भव्य मंदिर का निर्माण एवं प्राण प्रतिष्ठा भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास के प्रतीक हैं। छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेशवासियों के लिए ‘अयोध्या धाम श्रीरामलला दर्शन योजना’ संचालित कर रही है।

प्रसाद योजना के अंतर्गत 48 करोड़ रुपये की सहायता से मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर, डोंगरगढ़ में विकास कार्य पूर्ण हुआ है। स्वदेश दर्शन योजना में जशपुर, सरगुजा, बिलासपुर और जगदलपुर के जनजातीय पर्यटन सर्किट के लिए 94 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं।

स्वदेश दर्शन 2.0 में कबीरधाम के भोरमदेव कॉरिडोर के लिए 146 करोड़ रुपये और जशपुर के मयाली-बगीचा इको-टूरिज्म के लिए 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। चंपारण में संत श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की मूर्ति एवं कॉम्प्लेक्स की स्थापना के लिए 73.42 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है।

रायपुर में 200 करोड़ रुपये की लागत से ‘पीएम एकता मॉल’ बनाया जाएगा, जिससे हथकरघा, हस्तशिल्प और ग्रामोद्योग को नया बाजार मिलेगा। नवा रायपुर में निफ्ट की स्थापना भी स्वीकृत हुई है।

वैश्विक मंच पर बढ़ी भारत की प्रतिष्ठा, छत्तीसगढ़ को भी मिल रहे नए अवसर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका और प्रतिष्ठा का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। जी-20 की अध्यक्षता, ब्रिक्स में भारत की प्रभावी भूमिका, अफ्रीकी संघ को जी-20 की स्थायी सदस्यता दिलाने की पहल तथा ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती देना भारत की बढ़ती वैश्विक क्षमता का प्रमाण है। दुनिया के 36 देशों द्वारा प्रधानमंत्री श्री मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया जाना भी भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को रेखांकित करता है।

इंटरनेशनल सोलर अलायंस, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष जैसी भारत की पहलों का लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिला है। श्रीअन्न को वैश्विक पहचान मिलने से बस्तर और सरगुजा के कोदो, कुटकी एवं रागी उत्पादक जनजातीय किसानों के लिए नए बाजार और आर्थिक अवसर सृजित हुए हैं।

‘विकसित छत्तीसगढ़’ बनेगा ‘विकसित भारत 2047’ का मजबूत आधार

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के महासंकल्प में प्रभावी भागीदारी के लिए राज्य सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ का रोडमैप तैयार किया है।

उन्होंने कहा कि नक्सलमुक्त बस्तर, खनिज एवं ऊर्जा की अपार संपदा, मेहनती किसान, सशक्त महिलाएं, युवा शक्ति, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और निवेश के अनुकूल वातावरण छत्तीसगढ़ की बड़ी ताकत हैं। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ की भावना के साथ मंत्रिपरिषद ने ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के माध्यम से ‘विकसित भारत 2047’ के निर्माण में पूर्ण योगदान देने का संकल्प दोहराया है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत और छत्तीसगढ़ समृद्ध, सुरक्षित, आत्मनिर्भर और विकसित भविष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे।

पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक के 36 रिक्त पदों पर भर्ती को मंजूरी

मुख्यमंत्री श्री साय ने मंत्रिपरिषद के अन्य निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने पूर्व अग्निवीर सैनिकों के अनुभव, अनुशासन और दक्षता का लाभ राज्य की सेवाओं में लेने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

मंत्रिपरिषद ने पूर्व अग्निवीरों के लिए गृह विभाग में आरक्षक के कुल 36 पदों पर उपलब्ध रिक्तियों के विरुद्ध भर्ती की अनुमति प्रदान की है। राज्य शासन द्वारा पूर्व अग्निवीरों के लिए इन पदों पर 10 प्रतिशत श्रेणीवार आरक्षण का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है।

‘आदिम जाति विकास विभाग’ का नया नाम होगा ‘जनजातीय कार्य विभाग’

मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की है। इसके अंतर्गत ‘आदिम जाति विकास विभाग’ का नाम परिवर्तित कर ‘जनजातीय कार्य विभाग’ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, जनकल्याण और विकास के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के विजन को धरातल पर उतारने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।
Advertisement