'चीन-अमेरिका में लड़ाई छिड़ जाती', AI की एक गलती कैसे दो महाशक्तियों को ईरान में जंग के मुहाने पर ले आई थी, खुलासा

'चीन-अमेरिका में लड़ाई छिड़ जाती', AI की एक गलती कैसे दो महाशक्तियों को ईरान में जंग के मुहाने पर ले आई थी, खुलासा
बीजिंग: इस साल फरवरी के आखिर में इजरायल-अमेरिका ने ईरान पर हमले शुरू किए थे। इससे पश्चिम एशिया में एक भीषण जंग छिड़ी। इस लड़ाई के कुछ ही हफ्ते बाद पर्दे के पीछे कुछ ऐसा हुआ था, जिसने चीन और अमेरिका को तकरीबन आमने-सामने लाने का इंतजाम कर दिया था। दोनों देशों में युद्ध जैसी नौबत आ सकती थी। इसकी वजह एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से हुई एक गलती थी, जिसे बिल्कुल आखिरी समय में सुधार लिया गया।

सीएनएन के मुताबिक, ईरान के साथ युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना को एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि पश्चिम एशिया में एक चीनी जहाज परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े पुर्जे ले जा रहा है। इस पर अमेरिकी सेना ने चीनी जहाज को रोकने के लिए अपना ऑपरेशन करने की तैयारी शुरू कर दी।

हमले की तैयारी में थी अमेरिकी सेना

रिपोर्ट मिलने के बाद हथियारबंद अमेरिकी जवान जहाज पर चढ़ने की तैयारी करने लगे, जबकि सैन्य विमान पहले से हवा में थे। ऑपरेशन शुरू होने से ठीक समय पहले अधिकारियों ने इंटेलिजेंस की एख बार बारीकी से जांच की तो पाया कि इसे AI से तैयार किया गया था। पता चला कि अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन्स कमांड के एनालिस्ट के चैटबॉट ने जहाज के मैनिफेस्ट (सामान की सूची) में दर्ज सामग्री की गलत पहचान की थी।

जहाज पर मौजूद चीजों की गलत पहचान की वजह से बनी इंटेलिजेंस रिपोर्ट को पूरी तरह से गलत माना गया। हालांकि यह इससे पहले कई आधिकारिक चैनलों से होकर गुजरी और इसे विश्वसनीय सैन्य इंटेलिजेंस माना जा रहा था। अमेरिकी सूत्र ने इस बारे में सीएनएन से बात करते हुए कहा, 'इससे लगभग युद्ध छिड़ ही गया था। हालांकि समय रहते चीजें सामने आईं, जिससे पश्चिम एशिया में एक बड़ा टकराव टल गया।'

AI तकनीक के जोखिम

इंटेलिजेंस एनालिस्ट के इस्तेमाल वाले सिस्टम की जानकारी रखने वाले पूर्व वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि यह घटना उन स्थितियों में AI-जनरेटेड एनालिसिस पर निर्भर रहने के जोखिमों को उजागर करती है, जहां तेजी से फैसले लेने होते हैं और गलती के नतीजे युद्ध के मैदान से आगे तक जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि चीनी जहाज पर चढ़ने की अमेरिकी कोशिश से वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच टकराव का खतरा पैदा हो सकता था। अमेरिकी सेना AI तकनीक का इस्तेमाल इंटेलिजेंस का विश्लेषण करने, टारगेट चुनने और लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन को संभालने के लिए कर रही है, जिसके अपने जोखिम हैं।

अमेरिकी सेना में बढ़ेगा इस्तेमाल

अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में चीन या किसी दूसरे देश के साथ टकराव की स्थिति में AI की मदद से तेजी से फैसले लिए जाएंगे। इसी साल जनवरी में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक्सेलरेशन स्ट्रैटेजी जारी की है, जिसका मकसद सेना में AI के इस्तेमाल बढ़ाना है।
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