सरकार ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते आयात पर असर पड़ा है। इसके बावजूद एलपीजी का भी पूरा इंतजाम किया गया है और घरेलू उपभोक्ताओं को पूरी सप्लाई की जा रही है। तेल और गैस मंत्रालय में सचिव नीरज मित्तल ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है। युद्ध के बावजूद करीब 60 दिनों का पेट्रोल-डीजल का भंडार है और लगभग 45 दिनों का एलपीजी भंडार मेंटेन किया जा रहा है। विभिन्न देशों से खरीद बढ़ाई गई है।
विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 703 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर बना हुआ है। साथ ही सरकार ने बताया कि भारत तेल शोधन करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है और चौथा सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक भी है। भारत वर्तमान समय में 150 से अधिक देशों को निर्यात कर रहा है तथा घरेलू मांग भी पूरी की जा रही है।पेट्रोलियम की कीमतें स्थिर
राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को पश्चिम एशिया की स्थिति पर गठित मंत्रियों के अनौपचारिक समूह की पांचवीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में बताया गया कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत में पिछले 70 दिनों से पेट्रोलियम कीमतों को स्थिर रखा गया है, जबकि कई देशों में कीमतों में 30 से 70 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।- वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण भारतीय तेल कंपनियां प्रतिदिन लगभग 1000 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं।
- वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में नुकसान करीब 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच रहा है।
- इसके बावजूद सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा बोझ आम नागरिकों पर न पड़े।











