*दिन - मंगलवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2083 (गुजरात अनुसार 2082)*
🌤️ *शक संवत -1948*
🌤️ *अयन - दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु - वर्षा ॠतु*
🌤️ *मास - श्रावण*
🌤️ *पक्ष - शुक्ल*
🌤️ *तिथि - षष्ठी शाम 05:50 तक तत्पश्चात सप्तमी*
🌤️ *नक्षत्र - स्वाती पूर्ण रात्रि तक*
🌤️ *योग - शुक्ल 19 अगस्त रात्रि 03:23 तक तत्पश्चात ब्रह्म*
🌤️*राहुकाल - शाम 03:55 से शाम 05:31 तक*
🌤️ *सूर्योदय - 06:19*
🌤️ *सूर्यास्त - 07:05*
👉 *दिशाशूल - उत्तर दिशा मे*
🚩*व्रत पर्व विवरण- मंगलागौरी पूजन*
💥*विशेष- *षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
💥 *चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)*
💥 *चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।*
🌷 *गंगाजल के समान गुणकारी है मघा जल* 🌷
➡️ *(मघा नक्षत्र : 17 अगस्त 2026 दोपहर 02:16 से 31 अगस्त 2026 सुबह 10:14 तक)*
🌞 *भगवान सूर्य जब मघा नक्षत्र में रहते हैं तब आकाश से गिरनेवाला वर्षा का जल गंगाजल के समान माना जाता है। "जब सूर्य की मघा नक्षत्र में उपस्थिति होती है तब होने वाली बरसात का पानी गंगामय है। मघा नक्षत्र का जल छान-छून के रख लो । रात को २-२ बूँदें आँखों में डालो और सुबह आँखों की खराबी गायब ! वह पानी बच्चों को05:50 पिलाओ महीना-दो महीना तो पेट के कृमि गायब ! जैसे गंगाजल में दूसरा कोई गड़बड़ जल भी मिलता है तो गंगाजल उसको ठीक कर देता है वैसे ही मघा नक्षत्र के पानी में यह प्रभाव है।*
👉🏼 *मघा नक्षत्र के दिनों में बारिश हो रही थी, मैंने आसमान की तरफ देखा और पलकें खोलकर रखीं तो आँखों में वह मघा नक्षत्र का पानी आया। इससे आँखों में भी मेरे को विशेष फायदा हो गया । आँखों में जो चिपचिपापन होता था वह भी कम हो गया। एक दिन ही लगाया तो इतना फायदा हो गया !*
👉🏼 *मघा का यह पानी पीने से पेट की समस्याओं में बहुत फायदा होता है। अगर आप कोई आयुर्वेदिक दवा ले रहे हैं तो मघा जल के साथ लें, उसके फायदे बहुत बढ़ जायेंगे। यह पानी आपके घर में खाना बनाने के लिए, स्नान के लिए भी बहुत अच्छा है।"
जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
अंक ज्योतिष का सबसे आखरी मूलांक है नौ। आपके जन्मदिन की संख्या भी नौ है। आप सही मायनों में उत्साह और साहस के प्रतीक हैं। मंगल ग्रहों में सेनापति माना जाता है। अत: आप में स्वाभाविक रूप से नेतृत्त्व की क्षमता पाई जाती है। लेकिन आपको बुद्धिमान नहीं माना जा सकता। मंगल के मूलांक वाले चालाक और चंचल भी होते हैं। आपको लड़ाई-झगड़ों में भी विशेष आनंद आता है। आपको विचित्र साहसिक व्यक्ति कहा जा सकता है। यह मूलांक भूमि पुत्र मंगल के अधिकार में रहता है। आप बेहद साहसी हैं। आपके स्वभाव में एक विशेष प्रकार की तीव्रता पाई जाती है।
शुभ दिनांक : 9, 18, 27
शुभ अंक : 1, 2, 5, 9, 27, 72
शुभ वर्ष : 2029, 2036, 2045
ईष्टदेव : हनुमान जी, मां दुर्गा।
शुभ रंग : लाल, केसरिया, पीला
