सोमवार को गिरफ्तारी के विरोध में छत्तीसगढ़ प्रदेश राजस्व लिपिक संघ और छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा है और जरूरत पड़ने पर सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी दी है।
पुलिस ने तहसील कार्यालय के कर्मचारी गरीब बिंझवार, नरेंद्र कौशिक और हरिराम राठौर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इससे पहले गोविंद विश्वकर्मा, वकील खांडेकर और डॉक्टर प्रियंका सोनी की भी गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस के मुताबिक, अब 8 अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाने हैं।
एक दिन की हड़ताल से कामकाज ठप
इधर, लिपिकों (क्लर्क) की गिरफ्तारी के विरोध में तहसील कार्यालय के कर्मचारियों ने लिपिक संघ के नेतृत्व में पूरे दिन हड़ताल की। इससे पहले भी 20 जुलाई को कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था। हड़ताल की पहले से जानकारी नहीं होने के कारण दूर-दराज से आए लोगों को काफी परेशानी हुई। उनका काम नहीं हो सका और उन्हें वापस लौटना पड़ा।
हड़ताल की वजह से तहसील का काम पूरी तरह बंद रहा। सीमांकन, बंटवारा और नामांतरण जैसे मामलों की सुनवाई नहीं हो सकी। फाइलें भी लंबित पड़ी रहीं। हालात ऐसे थे कि तहसीलदार कोर्ट में मौजूद थे, लेकिन फाइलें पेश करने के लिए कोई कर्मचारी नहीं था।
अब तबादले के जुगाड़ में जुटे कर्मचारी
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, मामले में नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के डर से तहसील के कई कर्मचारी अब अपना तबादला कराने की कोशिश में जुट गए हैं।
वहीं, इस मामले में सात तहसीलदारों को भी नोटिस जारी किया गया है। इसके विरोध में छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने तहसीलदारों का पक्ष रखा है। संघ ने पूरी प्रक्रिया का हवाला देते हुए शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा है।
8 लिपिकों का होना है बयान, संघ ने खोला मोर्चा
सरकंडा थाना में आर्थिक सहायता मामलों में दर्ज एफआईआर के बाद तीन राजस्व लिपिकों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब अन्य लिपिकों की गिरफ्तारी की भी आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने 8 लिपिकों को बयान दर्ज कराने के लिए थाने बुलाया है।
वहीं, तीन लिपिकों की गिरफ्तारी के बाद मामला और गरमा गया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश राजस्व लिपिक संघ ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए संभागायुक्त, आईजी और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।
संघ ने बाकी राजस्व लिपिकों के खिलाफ कार्रवाई रोकने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संघ का कहना है कि पूरी जांच से पहले कर्मचारियों को आरोपी बनाया जा रहा है, जिससे राजस्व कर्मचारियों में डर का माहौल है।
बयान के लिए बुलाया, फिर कर दी गिरफ्तारी
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकंडा थाने में दर्ज अलग-अलग मामलों में तीन राजस्व लिपिकों को पहले बयान देने के लिए बुलाया गया, लेकिन बाद में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
संघ का कहना है कि इसके बाद आठ अन्य लिपिकों को भी बयान के लिए नोटिस दिया गया। सभी कर्मचारी 23 जुलाई को थाने पहुंचे और जांच में पूरा सहयोग किया। इसके बावजूद उन्हें कार्रवाई का डर बना हुआ है।











